अयोध्या ध्वजारोहण समारोह: गरीब, किन्नर समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं को मिला विशेष निमंत्रण

🎉 आख़िरकार वह क्षण आ गया ! अयोध्या में कल होगा महान ध्वजारोहण समारोह — जानिए किस-किस को मिला निमंत्रण

कल, 25 नवंबर 2025 को अयोध्या में होने वाले राम जन्मभूमि मंदिर (राम मंदिर) के ध्वजारोहण समारोह को लेकर तैयारियाँ चरम-पर हैं। इस बार सिर्फ राजनेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों को नहीं, बल्कि समाज के आदर्श आम नागरिकों, गरीब-पीड़ितों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किन्नर समुदाय के प्रतिनिधियों को भी निमंत्रण दिया गया है — ताकि यह आयोजन सचमुच “सामावेशी हो और हर-हर दिल तक पहुंचे

🔍 किन- किन को आमंत्रित किया गया है?

✅ सामाजिक कार्यकर्ता व आम नागरिक

  • उत्तर प्रदेश के काशी क्षेत्र से आए सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर सहित अनेक लोग शामिल हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में गरीबों और वंचितों की सेवा कर रहे हैं। UniIndia+1

  • सामाजिक-सेवा में निस्वार्थ योगदान देने वाले लोगों को भी निमंत्रण सूची में स्थान दिया गया है। NewsX+1

  • उन ग्रामीण प्रधानों (gram pradhans) को भी आमंत्रित किया गया है, जो 24 जिलों से आए हैं और जिनका काम अक्सर चर्चा में रहता है। Hindustan Times+1

✅ गरीब, कमजोर व वंचित समुदाय

  • समारोह का थीम रखा गया है “समरस समाज” — यानी उस समाज का संदेश जिसमें जात- पात, गरीबी या सामाजिक स्थिति कोई बाधा न हो। The Indian Express+1

  • निमंत्रित सूची में SC, ST, OBC समुदायों से जुड़े लोगों को विशेष रूप से शामिल किया गया है ताकि यह आयोजन बड़ा-पारंपरिक न होकर आगे बढ़ने वाला प्रतीक बने सके । The Indian Express+1

✅ किन्नर समुदाय व भिन्न-भिन्न सामाजिक-पृष्ठभूमि

  • आयोजन में विविधता को प्रमुखता दी जा रही है — जिसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जो लंबे समय तक सामाजिक दृष्टि से पिछड़ रहे हैं। (क्योंकि “सामावेशी” आयोजन तभी सचमुच सफल होता है जब हर-घर तक पहुँचता हो)। The Indian Express+1

🌟 क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण?

  • पहले के आयोजनों में जो सूची आम थी, उसमें मुख्यतः प्रमुख से प्रमुख लोग शामिल होते थे — उद्योगपति, सितारे, राजनेता। www.ndtv.com+1

  • इस बार की तैयारी का मकसद — वो चेहरे जो पब्लिक-लाइट में कम रहे — उन्हें मंच पर लाना और उन्हें यह सम्मान देना कि वे भी इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा हों सके ।

  • यह संदेश जाता है कि मंदिर-धर्म का सिर्फ़ प्रतीक नहीं, बल्कि समाज-निर्माण, समानता, सभी के लिए गौरव है।

🕒 आयोजन से जुड़ी कुछ अहम बातें

  • समारोह के लिए लगभग 6,000 + मेहमान आमंत्रित किए गए हैं। The Times of India+1

  • शतरंजी रंगों (colour-coded seating) में आयोजन की व्यवस्था की गई है ताकि विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक-वर्गों व समुदायों को समान रूप से स्थान दिया जा सकें। The Times of India

  • इस बार मुख्य फोकस है: “हर-जन को हिस्सा देना, हर-किसी को प्लेटफॉर्म देना” — यही इस आयोजन की विशिष्टता है।

✅ निष्कर्ष

कल अयोध्या में होने वाला ध्वजारोहण समारोह सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है — यह एक सामाजिक-उत्थान का प्रतीक बन रहा है।जब गरीब, वंचित, सामाजिक-सेवक, किन्नर समुदाय और ग्रामीण प्रधान सभी एक-साथ उस मंच पर उपस्थित होंगे, तो वह पल इतिहास में दर्ज होगा — उस पल में यह संदेश होगा कि धर्म और संस्कृति सिर्फ उच्चतम स्थानों के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए ही हैं

आइए-आइए, कल उस ऐतिहासिक मौके को देखें, और देखें कैसे-कैसे चेहरे-छोटे-बड़े सब मिलकर उस ध्वज को लहराते हैं — क्योंकि इस ध्वज के नीचे सभी का गौरव समाहित है

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